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रचनाकार परिचय:-

1956 में जन्मे धीरेद्र अस्थाना गढ़वाल विश्वविद्यालय के स्नातक हैं और उन्होंने 18- 19 बरस की उम्र से लिखी अपनी शुरुआती कहानियों से ही अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। लोग हाशिये पर, आदमी खोर, मुहिम, विचित्र देश की प्रेम कथा, जो मारे जायेंगे, उस रात की गंध, (कहानी संग्रह) समय एक शब्द भर नहीं है, हलाहल, गुजर क्यों नहीं जाता (उपन्यास) और रूबरू, अंतर्यात्रा (साक्षात्कार) उनकी कृतियां हैं। अब तक राष्ट्रीय संस्कृति पुरस्कार, घनश्याम दास सराफ साहित्य सम्मान, मौलाना अबुल कलाम आजाद पत्रकारिता पुरस्कार और इंदु शर्मा कथा सम्मान पा चुके धीरेद्र की जीवन यात्राएं बहुत बीहड़ रही हैं। दिनमान, चौथी दुनिया, जनसत्ता, जागरण में लम्बे समय तक वरिष्ठ पदों पर रह कर पत्रकारिता के बाद अब मुंबई में सहारा समय में एसोसिएट एडिटर।


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धीरेन्द्र सिंह का जन्म १० जुलाई १९८७ को छतरपुर जिले के चंदला नाम के गाँव में हुआ था| आपने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा चंदला में ही पूरी की। वर्तमान में आप इंदौर में अभियन्त्रिकी में द्वितीय वर्ष के छात्र हैं|

कविताएँ लिखने का शौक आपको अल्पायु से ही था, किन्तु पन्नो में लिखना कक्षा नवीं से प्रारंभ किया| आप हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं में रचनाएं लिखते हैं। आपका 'काफ़िर' तखल्लुस है |

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मेरा पूरा नाम धीरज आमेटा है, तखल्लुस 'धीर'! मैं राजस्थान के उदयपूर शहर का बाशिन्दा हुँ! अब तक उम्र के २६ सावन देख पाया हुँ! पिछ्ले तीन साल से गुड़ग़ाव(हरियाणा) में एक हार्डवेयर कम्पनी में इन्जिनियर की हैसियत से काम कर रहा हुँ!
शायरी की ओर रुझान तो कालेज के ज़माने से ही था मगर तब सिर्फ़ पढ़ना और सुनना मज़ा देता था! अब करीबन ढाई साल से शायरी करने का भी शौक़ हो गया है! इन्टेरनेट की चुनिन्दा अदबी महफ़िलों में शिरक़त कर के दोस्तों की खिदमत में अपनी गज़लें पेश करता हुं और उनके राय-मशवरों से सीखता हुँ! इन्ही महफ़िलों के ज़रिये मेरा परिचय मोहतरम सरवर अलम राज़ 'सरवर' से हुआ जिनकी रहनुमाई से मेरे सुखन का सफ़र चल रहा है!

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