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परिचय शीघ्र प्रकाशित...

5जून, 1968 को श्रीडूंगरगढ में जन्मे श्री रवि पुरोहित अजमेर विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक शोध कार्यों से जुड़े हुए तथा अनेक पुरुस्कारों से सम्मानित रवि पुरोहित 1986 से विभिन्न क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। राजस्थानी और हिंदी भाषा में अब तक आपकी छ: पुस्तकें विभिन्न विषयों पर छप चुकीं हैं। आपने कई स्तरीय पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी किया है।
रचनाकार परिचय:-
आगरा में जन्मी डॉ. रोली तिवारी मिश्रा पत्रकारिता एवं हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर हैं। आपने “लोक रंगमंच" पर शोधकिया है। बचपन से आपका कविता लेखन के साथ-साथ कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं से जुडाव रहा है। दैनिक जागरण में पत्रकार के तौर पर करियर की शुरुआत करने के बाद कुछ समय आकाशवाणी पर उदघोषिका रहीं। महाविद्यालय में पत्रकारिता विभाग में प्रवक्ता के तौर पर कुछ समय कार्य करने के बाद सैन्याधिकारी पति के साथ भारत के दूरदराज़ हिस्सों का सिंहावलोकन किया। स्वान्तः सुखाय लेखन भी साथ-साथ चलता रहा। वर्तमान में आप एक विद्यालय की प्रशासिका हैं।

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रचनाकार परिचय:-

जन्म इंदौर ,मध्यप्रदेश में हुआ. देवीअहिल्या विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक. लेखन में छात्र जीवन से ही रूचि थी.भारत और दुबई में रहने के बाद वर्त्तमान में अमेरिका के शर्लोट शहर में हैं. लेखन के साथ नृत्य , लोकल हिन्दुस्तानी रेडियो प्रोग्राम के साथ कई सांस्कृतिक कार्यकर्मों में पूरे परिवार के साथ सक्रिय हैं, अनेक रेडियो कार्यक्रम प्रसारित हो चुके हैं, जिनमें लेखन का भरपूर योगदान रहा है. पाक कला में निपुण है. ज्यादा वक्त लेखन और नृत्य में बिताना पसंद करती हैं.

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परिचय:-

सालासर में ६ नवम्बर, १९७३ को जन्मे राजाभाई कौशिक अजमेर के डी.ए.वी. कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत आयुर्वेद की ओर उन्मुख हुये और इस क्षेत्र में सुयश प्राप्त किया।

वर्तमान में राजस्थान के चुरू में निवास कर रहे राजाभाई ने अनेक कविताएं, लेख, व्यंग्य आदि लिखें हैं और कई सम्मान प्राप्त किये हैं। आप एक अच्छे चित्रकार भी हैं।

१२ मार्च, १९५१ को कानपुर के गाँव नौगवां (गौतम) में जन्मे वरिष्ठ कथाकार रूपसिंह चन्देल कानपुर विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी. हैं। अब तक उनकी ३८ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ६ उपन्यास जिसमें से 'रमला बहू', 'पाथरटीला', 'नटसार' और 'शहर गवाह है' - अधिक चर्चित रहे हैं, १० कहानी संग्रह, ३ किशोर उपन्यास, १० बाल कहानी संग्रह, २ लघु-कहानी संग्रह, यात्रा संस्मरण, आलोचना, अपराध विज्ञान, २ संपादित पुस्तकें सम्मिलित हैं। इनके अतिरिक्त बहुचर्चित पुस्तक 'दॉस्तोएव्स्की के प्रेम' (जीवनी) संवाद प्रकाशन, मेरठ से प्रकाशित से प्रकाशित हुई है।उन्होंने रूसी लेखक लियो तोल्स्तोय के अंतिम उपन्यास 'हाजी मुराद' का हिन्दी में पहली बार अनुवाद किया है जो २००८ में 'संवाद प्रकाशन' मेरठ से प्रकाशित हुआ है।सम्प्रति : स्वतंत्र लेखन
दो चिट्ठे- रचना समय और वातायन।

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रीना कपिल एक प्रतिभावान संगीतकार हैं और वर्तमान में फरीदाबाद स्थित "जी.बी.एन विद्यालय" में बतौर संगीत शिक्षिका कार्यरत हैं। रीना न केवल सितार व तबले में दक्ष है अपितु पंजाबी गीतों पर उनकी पकड़ गहरी है। प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत में प्रभाकर रीना कपिल 1988 से 1998 तक आकाशवाणी नई दिल्ली के युववाणी विभाग से भी जुडी रही हैं। रीना कपिल समय समय पर अपने कार्यक्रम विभिन्न मंचों पर प्रस्तुत करती रही हैं, यही नहीं प्रत्येक पूर्णमासी को नई दिल्ली के छतरपुर मंदिर में अपने भजनों के प्रस्तुतिकरण से वे श्रोताओं को निरंतर मंत्रमुग्ध करती रहती हैं।

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श्री राम शिवमूर्ति यादव जी समाज शास्त्र में काशी विद्यापीठ वाराणसी से स्नातकोतर हैं तथा देश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में इनकी रचनायें छपती रही हैं। बेव पर इनकी रचनायें साहित्य कुंज, रचनाकार, हिन्दी नेस्ट, स्वर्गविभा, कथाव्यथा, वांग्मय पत्रिका पर उपलब्ध हैं। सामाजिक व्यवस्था एंव आरक्षण (१९९०) प्रकाशित हो चुकी है तथा लेखों का एक अन्य संग्रह प्रेस में है। भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा "ज्योतिवा फ़ुले फ़ेलोशिप सम्मान से सम्मानित तथा राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा "भारती ज्योति" से सम्मानित। सम्प्रति : उत्तर प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृति के पश्चात स्वतन्त्र लेखन व अध्ययन एंव समाज सेवा|

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रचना श्रीवास्तव का जन्म लखनऊ (यू.पी.) में हुआ। आपनें डैलास तथा भारत में बहुत सी कवि गोष्ठियों में भाग लिया है। आपने रेडियो फन एशिया, रेडियो सलाम नमस्ते (डैलस), रेडियो मनोरंजन (फ्लोरिडा), रेडियो संगीत (हियूस्टन) में कविता पाठ प्रस्तुत किये हैं। आपकी रचनायें सभी प्रमुख वेब-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं।

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नाम- रितु रंजन जन्म तिथि- 1.071980, भागलपुर(बिहार)
रुचि- लेखन
साहित्यिक गतिविधिया- घर के साहित्यिक माहौल नें लिखने के लिये प्रेरित किया। अब ब्ळोगजगत में सक्रिय।
ईमेल:- rituranjan102@gmail.com

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रचना सागर अंतरजाल पर अपना ब्लॉग "मेरी कुछ यादें” पर सक्रिय है। ई-मेल- rachnasagar143@gmail.com पता- पत्नि श्री अभिषेक सागर फ़रीदाबाद (हरियाणा)- 121003 साहित्य शिल्पी पर इनकी रचनाओ के लिये यहाँ क्लिक करें।


दिल्ली के राजीव तनेजा की हास्य-व्यंग्य पढ़ने और लिखने में विशेष रुचि है। वे बी कॉम करने के बाद रैडीमेड दरवाज़े और खिड़कियों का व्यवसाय करते हैं। कुछ कहानियाँ तथा व्यंग्य रचनाएँ प्रकाशित 'हँसते रहो' नाम के एक चिट्ठा लोकप्रिय।

संपर्क- rajivtaneja2004@gmail.com

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साहित्य शिल्पी सम्पादक मंडली के सदस्य राजीव रंजन प्रसाद का जन्म बिहार के सुल्तानगंज में २७.०५.१९७२ में हुआ, किन्तु उनका बचपन व उनकी प्रारंभिक शिक्षा छत्तिसगढ राज्य के अति पिछडे जिले बस्तर (बचेली-दंतेवाडा) में हुई। कविता इन्हें विरासत में मिली है। कवि के शैशवकाल में ही पिता का देहांत हो गया था। पिता की लेखनी ही इनमें जीती है, ऐसा कवि का मानना है।

इन्होंने कविता, कहानी, निबन्ध, रिपोर्ताज, यात्रावृतांत, समालोचना के अलावा नाटक लेखन भी किया है साथ ही अनेकों तकनीकी तथा साहित्यिक संग्रहों में रचना सहयोग प्रदान किया है। राजीव की रचनायें अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं तथा आकाशवाणी जगदलपुर से प्रसारित हुई हैं। विद्यालय के दिनों में ही उन्होनें एक अनियतकालीन-अव्यावसायिक पत्रिका "प्रतिध्वनि" निकाली। लेखक ने 1989-1992 तक ईप्टा से जुड कर बैलाडिला क्षेत्र में अनेकों नाटकों में अभिनय किया है। 1995 - 2001 के दौरान उनके निर्देशित चर्चित नाटकों में किसके हाथ लगाम, खबरदार-एक दिन, और सुबह हो गयी, अश्वत्थामाओं के युग में आदि प्रमुख हैं।

राजीव की अब तक प्रकाशित पुस्तकें हैं - आमचो बस्तर (उपन्यास), ढोलकल (उपन्यास), बस्तर – 1857 (उपन्यास), बस्तर के जननायक (शोध आलेखों का संकलन), बस्तरनामा (शोध आलेखों का संकलन), मौन मगध में (यात्रा वृतांत), तू मछली को नहीं जानती (कविता संग्रह), प्रगतिशील कृषि के स्वर्णाक्षर (कृषि विषयक)। राजीव को महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा कृति “मौन मगध में” के लिये इन्दिरा गाँधी राजभाषा पुरस्कार (वर्ष 2014) प्राप्त हुआ है। अन्य पुरस्कारों/सम्मानों में संगवारी सम्मान (2013), प्रवक्ता सम्मान (2014), साहित्य सेवी सम्मान (2015), द्वितीय मिनीमाता सम्मान (2016) प्रमुख हैं।

राजीव रंजन प्रसाद ने स्नात्कोत्तर (भूविज्ञान), एम.टेक (सुदूर संवेदन), पर्यावरण प्रबन्धन एवं सतत विकास में स्नात्कोत्तर डिप्लोमा की डिग्रियाँ हासिल की हैं। वर्तमान में वे NHPC में प्रबन्धक (पर्यवरण) के पद पर कार्य कर रहे हैं।